ना नथ, ना झुमका, ना ये हार
बस प्यार ही है मेरा श्रृंगार I

 

इन गहनों का ना है कुछ मोल
पिया तेरा प्यार है अनमोल I

 

ये साज़ ये श्रृंगार ये जोड़ा पहन
आज बनी हूँ तेरी दुल्हन I

 

ये झुकी नज़र नहीं है समर्पण
खुद को तुम्हें करती हूँ अर्पण I

 

की संग रहें साथ चलें, करें एक दूजे का सम्मान
परछाईं नहीं अर्धांगनी हूँ, रहे सदा ये ध्यान I

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Painting by – Shweta Singh

8 COMMENTS

  1. Finished painting her a couple of months back. She was an 'on & off' project for more than a year. Felt a great sense of achievement when I put her up on the wall. A week back was looking at her and admiring her beauty and felt compelled to pen down a few lines on her behalf.

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